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Friday, July 24, 2009

गोत्र के रक्षको, हम आपकी पूजा करते हैं.

छाम्माक्छाल्लो को अपने देश के धर्म, जाती, वर्ग, वर्ण आदि पर पूरी श्रद्घा है और वह इसे पूजती है. वह यह मानती है कि देश के कण- कण का, इसके अनु-अनु का विकास हो. यह तभी संभव है, जब देश के कण- कण का, इसके अनु-अनु का अलग-अलग विवेचन हो. यह क्या बात हुई कि आप कहेंगे कि देश में एका हो जाय और सभी एक हो कर रहें. रहेंगे तो अपना अस्तित्व कहाँ जाएगा. और जब अस्तित्व ही नही रहा तो दुनिया में क्या भाड़ झोंकने आये हैं? देखिये, देश जबतक अलग-अलग रहेगा, देश का विकास होगा। धर्म के नाम पर विकास होगा, जाति के नाम पर विकास होगा, वर्ण के नाम पर विकास होगा, स्त्री के नाम पर विकास होगा, दलित के नाम पर विकास होगा। और तो और, गोत्र के नाम पर विकास होगा. यह सब समाज को मजबूत बनाने के लिए किया गया था. देखिये, हम कहते हैं कि लोग भाई-भाई की तरह रहें, सभी स्त्री, लड़की को माँ-बहन की तरह देखें. गोत्र की स्थापना इसीलिए तो की गई कि शुचिता बनी रहे. कितना अच्छा है, किसी तरह की गंदगी नहीं फ़ैल सकती. देश का सनातन सपना भी इसके झंडे तले सच होता है. अरे भाई, प्रेम का, एका का. लेकिन कूढ़ मगज, आज के लोग इसमें पलीता लगाने की सोचते रहते हैं. सोचते हैं, देश में टीवी आ गया, सिनेमा आ गया, देश चाँद पर पहुँच गया तो अपने सनातन व्यवस्था को आग के हवाले कर देंगे? इतना कमजोर समझ रखा है? नहीं, इसलिए छाम्माक्छाल्लो सभी के प्रति भक्ति भावः से नत मस्तक है. धर्म, गोत्र, जाती सभी व्यवस्था की पूजा करती है. अब इस पूजा की आंच में कोई जल जाता है तो जले. धर्म के नाम पर दंगे फूटते हैं तो फूटे. जाती न मिलाने पर या दूसरी जाती में शादी कर लेने पर जाती से बाहर कर दिए गए तो किये गए. जोडों की जान ले ली गई तो ले ली गई. सामान गोत्र में शादी करने पर दूल्हे को मार डाला गया तो मार डाला गया। जाती, गोत्र, धर्म के नाम पर इतनी बलि तो होती ही रहती है, होनी ही चाहिए. आख़िर इताना पुराना समाज है। यह सब तो हवं कुंद है, जिसमें किसी न किसी को समिधा तो बनाना ही पङता है. समान गोत्र में सभी भाई- बहन तो किसी के प्रति किसी के मन में मलिन भाव नहीं आयेंगे। अब आए और शादी भी कर ली तो सज़ा तो मिलनी ही चाहिए ना। सो मिली। अब इस पर इतनी चीख पुकार मचाने की क्या ज़रूरत? औअर मचाने से ही क्या हमें न्याय मिल जाएगा? क्या रूप कुनार को न्याय मिल गया? खैरलांजी को मिल गया? अभी-अभी सविता नाम की टीचर को निर्वस्त्र कर के घुमाया गया, उसको न्याय मिल गया? कितनी दलित महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया, कितनों को मौत के घाट उतार दिया गया, सभी को न्याय मिल गया? रहने देन। हमारी यद् दाश्त वैसे भी बहुत कमजोर है। लोगों के सामने भी बहुत सी प्राथमिकताएं हैं। अभी कल कोई नया, ज़्यादा सनसनीखेज़ समाचार मिलेगा, सब उस तरफ़ को लपक लेंगे। गोत्र-वोटर चला जाएगा चूल्हे में।

इसलिए छाम्माक्छाल्लो बहुत खुश है. हे धर्म, जाती, वर्ण, गोत्र के रक्षकों, आपसे छाम्माक्छाल्लो की गुजारिश है कि अनंत -अनंत काल तक ऐसा करते रहें, चाहे दुनिया कही से कही तरक्की कर ले, चाहे विज्ञान कितना भी आगे बढ़ जाए, चाहे तकनीक के बल पर हम इंटरनेट और बेतार के तार से संचार करने लगें, आप सब अपनी मान्यताओं के संग बने रहे, प्लीज. आखिर देश के अनु-अनु के विकास का सवाल है. इस विकास के रास्ते में जो भी आये, उसे चीर कर रख दें. हमें आपकी व्यवस्था पर बड़ा भरोसा है- सचमुच.

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