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Thursday, June 22, 2017

पार्टी व शॉपिंग- पति पत्नी के जोक्स का उल्टा-पुल्टा रूप -33

शाॅपिंग में मशगूल बीवी का 
सब्र से साथ देना भी मुहब्बत है गालिब...!
.
ज़रूरी नहीं हर कोई "ताज-महल" बनवाता फिरे...!

पार्टी में मशगूल मियां का 
सब्र से साथ देना भी मुहब्बत है गालिब...!
.
ज़रूरी नहीं हर कोई "सावित्री" बनी फिरे...!

Wednesday, June 21, 2017

*on occasion of Yoga day. Tips :*पति पत्नी के जोक्स का उल्टा पुल्टा रूप-32


पत्नी कुछ भी कहे तो
गर्दन को दो बार ऊपर से नीचे करें ,
*ये सर्वश्रेष्ट योग  है,*

यह योग न सिर्फ आपको बीपी, अनिद्रा, बेचैनी, चिढ़चिढ़ापन इत्यादि रोगों से बचाता है बल्कि  यह योग आपके खुशहाल जीवन की कुँजी है....

नोट : *गर्दन को कभी भी दाँये से बाँये न घुमावें,  ये जानलेवा हो सकता है*.....😜😂😆🤣

 *on  occasion of Yoga  day.           Tips :*

पति कुछ भी कहे तो
गर्दन को दो बार ऊपर से नीचे करें ,
*ये सर्वश्रेष्ठ योग  है,*

यह योग न सिर्फ आपको बीपी, अनिद्रा, बेचैनी, चिढ़चिढ़ापन इत्यादि रोगों से बचाता है, बल्कि  यह योग आपके खुशहाल जीवन की कुँजी है....

नोट : *गर्दन को कभी भी दाँये से बाँये न घुमावें,  ये जानलेवा हो सकता है*.....😜😂😆🤣

योग- पति पत्नी के जोक्स का उल्टा-पुल्टा रूप-31

बहुत जगह यह जोक चल रहा है। हँसने हंसाने के आवाहन के साथ। जैसा कि हमेशा करती हूँ, पति के बदले पत्नी कर दिया है। हंसिए। बताइयेगा कि कितना हंसे/हंसीं।

 एक शादीशुदा की दुखी कलम से योग दिवस ।

योग दिवस को मैं , कुछ इस तरह से मना रहा हूँ,
रात को उसके पैर दबाए थे अब पोंछा लगा रहा हूँ।

धो रहा हूँ बर्तन और बना रहा हूँ चपाती,
मेरे ख्याल से यही होती है कपालभाति।

एक हाथ से पैसे देकर, दूजे हाथ में सामान ला रहा हूँ मैं,
और इस प्रक्रिया को अनुलोम विलोम बता रहा हूँ मैं।

सुबह से ही मैं , घर के सारे काम कर रहा हूँ,
बस इसी तरह से यारों प्राणायाम कर रहा हूँ।

मेरी सारी गलतियों की जालिम ऐसी सजा देती हैं,
योगो का महायोग अर्थात मुर्गा बना देती हैं।

हे योग देव अगर आप गृहस्थी बसाते,
तो हम योग दिवस नहीं पत्नी दिवस मनाते।

 एक शादीशुदा की 'दुखी' कलम से योग दिवस की मासूम सी योग गाथा ।

हँसते रहिये , हँसाते रहिये ।

एक शादीशुदा की दुखी कलम से योग दिवस ।

योग दिवस को मैं , कुछ इस तरह से मना रही हूँ,
रात को उसके पैर दबाए थे अब पोंछा लगा रही  हूँ।

धो रही हूँ बर्तन और बना रही हूँ चपाती,
मेरे ख्याल से यही होती है कपालभाति।

एक हाथ से पैसे देकर, दूजे हाथ में सामान ला रही हूँ मैं,
और इस प्रक्रिया को अनुलोम विलोम बता रही हूँ मैं।

सुबह से ही मैं , घर के सारे काम कर रही हूँ,
बस इसी तरह से दोस्तों प्राणायाम कर रही हूँ।

मेरी सारी गलतियों की जालिम ऐसी सजा देते हैं,
योगो का महायोग अर्थात मुर्गा बना देते हैं।

हे योग देव, अगर आप गृहस्थी बसाते,
तो हम योग दिवस नहीं, पति दिवस मनाते।

 एक शादीशुदा की 'दुखी' कलम से योग दिवस की मासूम सी योग गाथा ।

हँसते रहिये , हँसाते रहिये ।