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Friday, May 20, 2011

पति जायज, प्रेमी नाजायज.


छम्मकछल्लो को अपने देश में एक ही चीज के लिए अलग अलग मान्यता के कारण बडी उलझन होती है. विवाह के बाद सेक्स जायज, विवाह से पहले नाजायज. विवाह के बाद पैदा बच्चा जायज, विवाह के पहले नाजायज. कम उम्र की लडकी का ब्याह अधेड बूढे से हो तो जायज, अधेड उम्र की औरत का ब्याह नाजायज. अधेड उम्र का पति हो तो जायज, अधेड उम्र का प्रेमी हो तो नाजायज. नहीं, नहीं... यहां तो पति बाल भी हो तो जायज, मगर प्रेमी हर हाल और उम्र में नाजायज. बडे लोग रिश्वत लें, काला धन बनाएं, उसे छुपाएं तो जायज, छोटे लोग घूस लें, घर में कुछ पैसे आ जाने की नीयत से कुछ पैसे बना लें तो नाजायज. बाल और आंखे काले तो जायज और शुभ काम में काले रंग का कुछ चढा दें तो नाजायज. काली आंखों में काला काजल लगाएं तो जायज, नजर न लगने के लिए काला टीका लगाएं तो जायज और माथे पर काली बिंदी लगा लें तो नाजायज. आंखों के कोए सफेद तो जायज, मगर किसी को शुभ मौके पर सफेद वस्त्र उपहार में दें तो नाजायज. अपनी बत्तीसी सफेद, बदन की हड्डी सफेद तो जायज, मगर किसी शुभ मौके पर कोई उजले कपडे पहनना चाहे तो नाजायज. हरे रंग की धरती तो जायज, हरे रंग का झंडा नाजायज. वीरता का प्रतीक भगवा रंग कभी था जायज मगर एक पार्टी का रंग हो जाने के कारण अब यह रंग ही दूसरे के लिए नाजायज. मर्जी से ब्याह न कर पाने के लिए बच्चों का खून कर देना जायज, मगर बच्चों की आंखों में प्रेम की लाली का छाना नाजायज. मर्द दस जगह मुंह मार कर आए तो जायज, औरत सोचे भी तो नाजायज. राधा कृष्ण प्रेम करें तो जायज, आज के लोग करें तो नाजायज. कृष्ण-द्रौपदी का सखा भाव जायज, आज के स्त्री –पुरुष की दोस्ती नाजायज. इंद्र और विष्णु द्वारा क्रमश: अहिल्या और वृन्दा का छल से भोग जायज और उन्हें दोषी ठहराना नाजायज.
बडी लम्बी चौडी लिस्ट है भैया इस जायज और नाजायज की. जायज और नाजायज मन का फितूर है और फितूर में यह बात दूर और दूर चली जाती है कि प्रकृति ने सबकुछ अपने हिसाब से जायज बना कर ही भेजा है. रंगों का खेल हो या नदी या ताल, रूप या चाल या भारतीय मिथक का धमाल. आपके कोटे में भी जायज और नाजायज की सूची होगी. जोडते जाइए इस कडी से और भी कडी. देखें तो, होती है सूची- बडी- कितनी बडी?   

8 comments:

रेखा श्रीवास्तव said...

यहाँ सब जायज और नाजायज की परिभाषा तय किसने की है. जिसने तय की है उसके पास इसका उत्तर ही नहीं है, फिर क्यों बेकार में सर खपाया जाय. कोई भाव नहीं देता अगर हमने इसका जवाब माँगा तो, अगर उन्होंने कोई प्रश्न किया तो उत्तर देना जरूरी है. ये सुविधानुसार काम चला लिया जाता है. अगर दबंग है तो सब जायज और कमजोर हैं तो सब नाजायज. जिसकी लाठी उसकी भैंस. पैसे वालों के लिए कुछ भी नाजायज नहीं है. सब उनका शौक और हक़ बनता है. इस लिए इसे यही छोडो और आगे बढ़ो. कोई उत्तर नहीं देने वाला.

nitin said...

jayaz aur nazayaz hamare dil pai nirbhar karta hai,paise se ham galat ko sahi karte hai, par apne dil ko to dhoka nahi de sakte.ha zindagi mai ek bar dhoka khane ke bad jayaz aur nazayaz ka kuch matlab hi nahi hota,agar hame pyar ko kayam rakhana hai to jayaz aur nazayaz ke bare mai sochna zaruri hai, agar ish ko ham nazar andaz karege to pyar ka namonishan mit jayega......

Rahul Singh said...

''ना'जायज'' में जायज तो शामिल है ही.

Vibha Rani said...

जी राहुल जी, यह 'ना' हट जाए तो हमें अपने आपको क्षितिज तक ले जाने का विस्तार मिलेगा.

मीनाक्षी said...

इस जायज और नाजायज की लिस्ट पढ़कर तो लगता है हम खुद ही इस 'ना' से डरे हुए हैं... क्यों न इस 'ना' को हम खुद ही हटा दें... हमने ही तो लगाया था...

Vibha Rani said...

मीनाक्षी,हटा दीजिए, हर कोई अपने अपने स्तर से भी हटाता चलेगा तो दुनिया का रंग बदलता जाएगा.

Anonymous said...

http://shayari10000.blogspot.com

अमित श्रीवास्तव said...

baat to aapki bilkul sach hai...