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Tuesday, September 22, 2009

“कम्बख्त इस आम आदमी को पैदा किसने कर दिया?”

मोहल्ललाइव पर पढ़ें छम्मक्छल्लो का आलेख। लिंक है- phttp://mohallalive।com/2009/09/21/vibha-rani-on-common-man-status/

छम्‍मकछल्‍लो ने हर बार की तरह इस बार भी ऊपरवाले को दोष देते हुए उन्हें कोसना शुरू कर दिया कि तभी चमत्कार हो गया। ऊपरवाला एकदम ऊपर से उतर कर नीचे वैसे ही आया, जैसे बड़े-बड़े लोग किसी भी बात पर गुस्सा हो कर एकदम से अपने घर की उपरी मंज़िल से नीचे उतर आते हैं, चाहे वह घर की सीढ़‍ियों से उतर कर नीचे आना हो या अपनी हरकत में नीचे आना हो। ऊपरवाला बड़े तैश में था। झट से पूछने लगा, “ऐ! मेरे को ये बता कि क्यों तूने बोला कि मैने आम आदमी क्यों बनाया?”
छम्‍मकछल्‍लो उसकी भाषा और तेवर पर हैरान। वह कुछ बोलना चाहती थी कि ऊपरवाले ने फिर कहा, “मेरी ज़बान पर मत जा छमिया। यह सब तेरी ही करतूत है। जब तू अपना नाम छम्‍मकछल्‍लो रख सकती है, तो क्या मैं ऐसी ज़बान नहीं बोल सकता?”
छम्‍मकछल्‍लो अभी भी पेसोपेश में थी। ऊपरवाले ने फिर कहा, “यह मत भूल कि यह दुनिया अब तुमलोगों की है, मेरी नहीं। मुझे तो जैसा बनाना आता था, बना कर दे दिया। और क्या नहीं दिया तुम लोगों को? प्यार, मोहब्बत की भाषा, आदर के गुर, सहानुभूति के तार, विनम्रता के एहसास, सहनशीलता की चादर। रहने के लिए इतनी बड़ी धरती, पीने के लिए इतने तालाब, जलाशय, झरने, खेती-बारी के लिए इतने बड़े भू खंड, छांव के लिए इतने बड़े-बड़े वृक्ष, चढ़ने के लिए हिमालय जैसा पर्वत। ऐसा क्या नहीं था जो नहीं दिया तुमलोगों को। और तुमलोग? अपने में ही मार-काट मचा-मचा कर एक-दूसरे के दुश्मन बन बैठे। सबको ज़्यादा चाहिए और इस दौड़ में जो आगे निकल गया, वह महान बन गया, खास बन गया, बाकियों को आम बना गया। मैंने तो सभी को एक ही जैसा बनाया था। आम और ख़ास तो तुम सबकी पैदाइश है। ग़लती करो तुम और गाली सुनें हम?”
छम्‍मकछल्‍लो के पास शब्द नहीं थे, उसे याद आ रहा था, खास लोगों द्वारा उचारे जानेवाले शब्द, आम लोगों के लिए, ये लोग जानवर हैं, सुअरबाड़े में रहते हैं। हवाई जहाज़ को भी पशुशाले में तब्दील कर देते हैं। अंग्रेज़ी में एक शब्द चल गया है – इकॉनॉमी। यह आपके आर्थिक स्तर से जुड़ जाता है। जहां किफायत की बात आती है, यह शब्द उसके साथ जुड़ जाता है। अब किफायत की बात तो आम आदमी ही करेगा ना। उसी की आमदनी सीमित है, उसे ही अपनी सीमित आमदनी में घर चलाना होता है, दुनिया के सारे कर्म निपटाने होते हैं। तरह-तरह के टैक्स भरने होते हैं। खास लोगों को इन सबसे मतलब नहीं होता। वे आम जन के पैसे पर अपने खास मकसद पूरे करते हैं, जैसे कोई बहुत बड़े-बड़े पद पर पहुंच जाते हैं और पांचतारा होटलों में रहने लगते हैं। उनका बंगला तैयार नहीं हुआ, तो वे क्या दोस्तों, रिश्तेदारों के यहां रहने जाएंगे? आम आदमी की तरह लिचरई करने लगे आप भी! अब आम आदमी क्या करे? उसके पास सिवा एक अफसोस के और हसरत है ही क्या कि काश, वह भी एक आम आदमी से खास आदमी बन पाता।
ऊपरवाले ने छम्‍मकछल्‍लो को उदास देखकर कहा, “लगता है, तुम्हें मेरी बात का बुरा लग गया। मगर तुम खुद सोच कर देखोगी तो पाओगी कि ख़ास आदमी बनने के बहुत फायदे हैं। लोग आपको पहचानने लगते हैं, आप किसी के पास रुक कर उससे दो बात कर लेते हैं तो वह आम आदमी अपने को धन्य-धन्य मानने लगता है। अगर उसके साथ चाय पी ली, या कुछ खा लिया या उसके साथ कहीं चले गये तो वह आपसे चाय के, रिक्शे के पैसे हर्गिज़-हर्गिज़ नहीं लेगा। वह तो इसी में “मन मेरो मुदित भयो आज” के तर्ज पर नाचता फिरेगा कि आप आज उसके साथ थे। आप उसके साथ फोटो खिंचवा लेते हैं तो वह आपको देवता से भी अधिक बढ़ कर पूजने लगेगा। तुम्हारे बारे में अख़बारों में छपेगा। बुरी भी बात छपी तो क्या हुआ? प्रचार तो होगा न? वो कहते हैं न कि बदनाम हुए तो क्या नाम नहीं होगा। नेता हो, अभिनेता हो, कुछ भी कर सकते हो। तुम्हारे देश में फिलहाल तो इन्हीं दोनों के पौ बारह हैं। हां, एक क़ौम और आ गयी है – खिलाड़‍ियों की। लेकिन सभी नहीं, केवल क्रिकेटर हो तो फायदे हैं। अब तनिक टेनिस की पूछ हुई है। लेकिन तुम तो ठहरी जनी जात, महिला क्रिकेटर की दुर्गत आम आदमी से कम नहीं। टेनिस खेल लो तो खेल लो, बाकी में कोई दम नहीं।”
ऊपरवाले ने छम्‍मकछल्‍लो से फिर कहा, “मेरी मानो, आम आदमी बने रहने पर गाली और अपमान के अलावा और कुछ भी नहीं मिलनेवाला। तुम ख़ास बन जाओ। सभी तुम्हें हाथो-हाथ लेंगे। अभी से इसकी क़वायद में लग जाओ।”
ऊपरवाले की ज़बान बदलने लगी थी। छम्‍मकछल्‍लो को समझ में आने लगा था कि उसके ख़ास बनने की प्रक्रिया शुरू होने लगी है। तभी तो ऊपरवाले की ज़बान बदलने लगी है। छम्‍मकछल्‍लो तनिक ऐंठी, ख़ास होने के भाव में तनिक अकड़ी कि नींद खुल गयी। ऊपरवाले का तो पता नहीं, मगर सोये-सोये में छम्‍मकछल्‍लो की कमर कचक गयी। अब वह सोच रही है कि किस नेता, अभिनेता, खिलाड़ी या अन्य खास आदमी को वह बुलाये कि उसकी कमर ठीक हो और वह चल-फिर सके। कल उसे अपनी ड्यूटी पर भी तो जाना है कि नहीं?

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