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Tuesday, September 15, 2009

यह लेडीगिरी छोडिए छम्मकछल्लो जी!

रिपोर्टर्स पेज पर देखिए छम्मक्छल्लो का यह आलेख। लिंक है- http://reporterspage.com/inhuman/701
छम्मकछल्लो फिर से मुदित है. उसके सपने में कल रात एक पति आये. पति तो पति होते हैं. वे किसी के भी सपने में आ सकते हैं, चाहे वह अपनी पत्नी के सपने में आये या दूसरे की पत्नी के सपने में. पति सभी एक जैसे हों या नहीं, कम्बख्त सारी पत्नियां एक जैसी होती हैं. उनकी चाहत के पोर पोर में बसी होती हैं इच्छाओं की अतल गहराई कि उनके पति केवल उनके बने रहें, उनकी हर बात मानें, उन्हें टूट टूट कर प्यार करे. उन्हें फूल से भी न छुएं. एक लडकी थी. उसने शादी के दो महीने बाद ही यह कह कर पति को छोड दिया कि आज तक उसने नहीं जाना कि पति का प्यार क्या होता है? छम्मक्छल्लो ने उसे समझाने की हर चन्द कोशिश की कि उसे जब 26 साल में नहीं पता चल पाया कि पति का प्यार क्या होता है, तो वह तो अभी अभी ब्याह कर आई ही आई है. पर ना जी, उसे नहीं मानना था. सो नहीं मानी. बाद में फिर पता नहीं कैसे उसे यह पता चल गया कि उसके पति का प्यार कैसा होता है और वह एक दिन अपने-आप बिना किसी शर्त के पति के घर लौट आई.
मगर सभी पति ऐसे नहीं होते. हर पति की अपनी-अपनी क्वालिटी होती है. एक पति को उसकी पत्नी ने उस पर नपुँसकता का आरोप लगाते हुए उसे छोड दिया और एक दूसरे विवाहित पुरुष से शादी भी कर ली. उस विवाहित पुरुष की पत्नी और घरवालों की काफी चिरौरी के बाद उस महिला ने उसके पति को छोड दिया और दुबारा अपने पति के घर आ गई. पति ने बडी दिलदारी दिखाते हुए उसे रख लिया. इस बात के करीबन 15-16 साल हो गए होंगे. वे दोनों बडा सुखी जीवन जी रहे हैं.
लेकिन सभी पति ऐसे नहीं होते और ऐसे न हो कर वे इन पतियों के लिए बडी सांसत खडी कर देते हैं. अभी दो तीन पहले छम्मकछल्लो ने अखबार में पढा कि एक पति ने पत्नी द्वारा पैसे ना देने पर ना केवल अपनी गर्भवती पत्नी की लातों से पिटाई की, बल्कि उसे बिजली के शॉक लगा कर उसे घायल कर दिया. अब वह अस्पताल में पडी है और पति जेल में. छम्मकछल्लो के सपने में यही पति आ गया. छम्मकछल्लो ने उससे पूछा कि उसने ऐसा क्यों किया? उत्तर में उसने अपने ही जैसे एक और पति को खडा कर दिया. उस दूसरे पति ने कहा कि "मैडम जी, बीबी को मारना तो कॉमन बात है. इसके लिए हमको हमारे नींद से जगा कर अपने सपने में काहे को बुलाया? मैं अपनी बीबी को मारता हूं, मेरा भाई मारता है. ये देखो." उसने एक और पति को छम्मकछल्लो के सामने ला खडा कर दिया और बोला, "ये मेरा बाप है, मगर मेरी मां का मरद है. यह भी मेरी माँ को मारता है."
छम्मकछल्लो की समझ में आया कि बीबी को मारना पति का जन्मसिद्ध अधिकार है. वह पति ही क्या, जो बीबी की ठुकाई ना करे. छम्मकछल्लो का जी फिर भी नहीँ माना. उसने सपने में आये पहले पति से पूछा कि तुमलोग तो कहते हो कि बीबी कम अक्ल की होती है, कमज़ोर होती है तो कमज़ोरों से मुकाबला करके या उस पर ज़ोर दिखा कर तुम्हें क्या मिलता है. पति बहुत बडे ज्ञानी संत की तरह मुस्कुराया और फिर बोला, "यह तो हमारी परम्परा है. बीबी तो बीबी, हम तो माँ को भी मारते हैं." "कैसे?" छम्मकछल्लो ने पूछा. पति बडी हिकारत भरी नज़रों से छम्मकछल्लो को देखते हुए बोला, "लगता है, आप शाश्त्र-वास्त्र नहीं पढतीं. नास्तिक हैं या कम्यूनिस्ट? अरे भगवान परशुराम ने अपने पिता के कहने पर अपनी माता का सर अपने फरसे से काटा था कि नहीं?" पति आगे बोला, "हमने तो अपनी बीबी को मारा ही हैं ना, ‘मारा’ तो नहीं है ना." छम्मकछल्लो ने इस पंक्ति का अर्थ पूछा. पति छम्मकछल्लो के मूढ मगज पर हँसते हुए बोला- "पहले मारने का मतलब पिटाई करना है और दूसरे मारने का मतलब जान से मारना है." छम्मकछल्लो ने पूछा "तो क्या तुम उसकी जान लेना चाहते थे? वह भी तब, जब वह तुम्हारे बच्चे की माँ बननेवाली है?" पति बोला, "शुक्र कीजिए कि मारा ही, राजा रामचन्द्र की तरह घर से तो नहीं निकाला अपनी हामिला बीबी को? वह बडा कि मैं? राम ने तो सीता को आग में ही झोंक दिया. मगर मैंने तो केवल बिजली के झटके ही लगाए. वह बडा कि मैं? अब मारने से बीबी को थोडी चोट कग गई, बिजली के झटके लगाने से थोडी बहुत घायल हो गई तो क्या हुआ? रसोई में काम करते समय जल जाती है कि नहीं? पानी भरते समय फिसल जाती है कि नहीं? सब्ज़ी काटते समय उंगली कट जाती है कि नहीं? मैडम, बहुत लेडिगिरी कर ली. दूसरे की बीबी हो, यह जान कर छोड रहा हूं. अपने सपने से मुझे विदा करो. देखना है कि बीबी के पास पैसे आये कि नहीं. बहुत सारे काम करने हैं. इनको (अपने साथ लाए अन्य पतियों को दिखाते हुए) भी यहां से विदा करो.
छम्मकछल्लो की नींद खुल गई. वह उन पतियों के प्रति श्रद्धा से भर उठी जो अपनी या दूसरों की बीबियों को इंसान समझते हैं, उसके सुख-दुख के साझीदार बनते हैं. छम्मकछल्लो की पडोसन आंटी का अभी दो दिन पहले निधन हुआ है. उसने देखा अँकल को उनके लिए रोते हुए. इन अच्छे-अच्छे पतियों के लिए छम्मकछल्लो का मन से आभार. मगर क्या कीजियेगा सपने में आए हुए इन पतियों का, जो अपनी करतूत से दूसरे पतियों की छवि भी खराब करते हैं. छम्मकछल्लो इन अच्छे पतियों को देख कर मुदित है. आप हैं कि नहीं, बताइयेगा.

5 comments:

Arun said...

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निर्मला कपिला said...

क्यों नही जी हम भी मुदित हैं बधाई

महेन्द्र मिश्र said...

ओह ओ बहुत खूब

दिनेशराय द्विवेदी said...

आप बहुत अच्छा व्यंग्य लिखती हैं। लेकिन कभी लगता है आप के विषय एकांगी होते जा रहे हैं। उन में विविधता होनी चाहिए। दुनिया में व्यंग्य के लिए बहुत विषय हैं, सब पर लिखिए। इस से आप का व्यंग्य लेखन और निखरेगा।
इस का अर्थ यह कदापि न लीजिएगा कि नारी के पक्ष में लिखने के लिए मना कर रहा हूँ।

Billo Rani said...

naari peer to naari jaane aur na jaane koye ! aur jo jaane naari peeda wa nar kavi hoye !!