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Wednesday, April 27, 2011

रेप करो, शेप करो.


      अखबार में छपी खबर के मुताबिक पाकिस्तान की मुख्तार माई को उसके गैंग रेप पर न्याय नहीं मिला. पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को आगे बढाते हुए छह में से 5 को बरी कर दिया. एक उम्र कैद की सजा में है. 2002 में एक ट्राइबल काउंसिल द्वारा गैंग रेप की शिकार मुख्तार माई पाकिस्तान में स्त्री अधिकार की एक प्रतीक के रूप में उभरी थी.
      छम्मक्छल्लो का दिल बाग बाग हो उठा. आखिर अपना ही पडोसी देश है, अपने ही जिगर का एक टुकडा. अलग हो गया तो क्या रवायतें भी छोड देगा? वह भी औरतों के मामले में? पता है, भाई लोग बमकेंगे छम्मक्छल्लो पर. पाकिस्तान से हिंदुस्तान की तुलना कर दी? इतनी बडी हिमाकत?
      छम्मक्छल्लो भी क्या करे? मुख्तार माई हिंदुस्तान में ही होती तो क्या हो जाता? उसे न्याय मिल जाता? भंवरी बाई को मिल गया था? प्रियदर्शिनी मट्टू को मिल गया था? रुचिका को मिल गया था? निठारी कांड में गई बच्चियों के मां बाप को मिल गया था? गोधरा कांड में हुई बर्बरता की शिकारों को मिल गया था? शाहबानो को मिल गया था? निरुपमा पाठक को मिल गया? दिन दहाडे बलात्कार, दहेज, यौन उत्पीडन की शिकार हिंदुस्तानी महिलाओं को मिल जाता है?
      बलात्कार तो हथियार है. सभी इसे हम औरतों पर आजमाते हैं. हर्र लगे ना फिटकरी, रंग चोखा आए. न गला कटे, न खून बहे, ना अंग कटे, न मांस का दरिया, न खून का दरिया, और बदला इतनी आसानी और सफलता से कि भाई वाह! मन के कटने की चिंता करेंगे तो रेप कैसे होगा? आप भी न! 
      एक ने छम्मक्छल्लो से कहा, “यह तो पुरानी कहावत है कि “इफ यू कांट प्रोटेस्ट रेप, एंजॉय इट”. आप इसके आगे जोड सकते हैं, “इफ यू कांट गेट जस्टिस, फॉरगेट इट”. भूल जाने में बडा भला है. मगर हमारा समाज दोहरा चौकन्ना है. वह बलात्कारियों को तो भूल जाता है, बलात्कृता को उंगली दिखा दिखा कर कहता है कि देखो, देखो, इसी का रेप हुआ है.
      गोधरा कांड के समय लोगों ने कहा था, “हम रेप थोडे करते हैं, हम तो शेप करते हैं.” आखिर को राज हमारा, सत्ता हमारी, नशा हमारा, नशेमन में चूर हम! हमारे हरम की तुम. तुम पर हम जैसा चाहें अपनी इच्छाओं, आवेगों के उद्दाम लहर उछाल सकते हैं. अहसान मान कि हमने तुम्हें इस लायक समझा.
      कम्बख्त ऊपरवाला बहुत नासमझ निकला. इन खातूनों को भी दिमाग दे दिया. मिले न कमीना ऊपरवाला, उसी का रेप कर डालेंगे, इतनी बार कि वह तंग आकर इन औरतों के माथे से दिमाग और सीने से दिल नाम के टुकडे निकाल बाहर कर दे. न दिल, न दिमाग, केवल देह और केवल हम! तब न रेप रहेगा न शेप. दिल और दिमाग ही नहीं रहेंगे तो ये फालतू बातें आएंगी कहां से इनके दिल और दिमाग में? भई वाह! भई आह!!

2 comments:

Sujit Sinha said...

chhammakchhallo ki itnai himmat ki itni baat kah di. hum to bas unke?dar se chup rahen.

Vibha Rani said...

सुजीत जी, यह डर ही अभिव्यक्ति की ताकत भी देता है.