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Friday, April 22, 2011

क्या आपको पता है मंसूर अली खान पटौदी कौन हैं?


      क्या आपको पता है मंसूर अली खान पटौदी कौन हैं? आप हंसेंगे छम्मक्छल्लो के कूढ मगज पर. छम्मक्छल्लो को खेल-खिलाडी का ककहरा भी नहीं मालूम. लेकिन उसे यह मालूम है कि आप सभी को मालूम है कि मंसूर अली खान पटौदी कौन हैं? नवाब पटौदी, टाइगर पटौदी, क्रिकेट की आन, बान और शान.
      टाइगर पटौदी के क्रिकेट काल में छम्मक्छल्लो बहुत छोटी थी. तब सीरीज का और रेडियो का जमाना था. भाई रेडियो से चिपके रहते और रेडियो की कमेंट्री से वह तनिक मनिक क्रिकेट समझने लगी थी.
      तब फिर आप पूछेंगे कि इस सवाल का मतलब? सीरीज का जमाना गया, रेडियो का जमाना गया, नवाब पटौदी का भी ज़माना गया. मगर लोग उन्हें नहीं भूल सकते, जब भी क्रिकेट की बात चलेगी.
      आजकल का समय बदला है. अब लोगों के परिचय इस तरह से नहीं दिए जाते. अब दिए जानेवाले परिचय की एक बानगी देखिए.चेन्नै से निकलनेवाले हिंदी के सबसे बडे अखबार समूह राजस्थान पत्रिका के 21/4/2001 के सम्पादकीय पृष्ठ पर छपे बात-करामात कॉलम के तहत छपे लेख नादान सवाल में नवाब पटौदी का परिचय देखिए- “फिल्म तारिका शर्मिला टैगोर के शौहर, सुंदरी करीना कपूर के अधेड प्रेमी सैफ अली खान के वालिद और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मंसूर अली खान उर्फ नवाब पटौदी......!
      आप कहेंगे कि इसमें ऐसी क्या बात हो गई? तो भाई, जिसका कर्मणा जो परिचय है, पहले वह तो दीजिए. नवाब पटौदी पहले क्रिकेट के खिलाडी बने, बाद में शर्मिला टैगोर के पति और बाद में सोहा या सैफ के पिता. पर नहीं, हम इतने उदार थोडे ना हो जाएंगे. सुंदरियां जब बूढों, अधेडों पर मरती हैं, तो बाकियों के कलेजे पर चक्कू चलने लगते हैं. पढिए- सुंदरी करीना कपूर के अधेड प्रेमी सैफ अली खान ....! और उसके पिता नवाब पटौदी! भई वाह! क्या परिचय है क्रिकेट के इस लायन का! दूसरे, जब मुसलमानों पर बात आती है तो हमें भले उर्दू ना आती हो, मगर एकाध जुमला ज़रूर छोड देंगे- पढिए- “फिल्म तारिका शर्मिला टैगोर के शौहर, सैफ अली खान के वालिद ....! पति और पिता कहने से लेख का स्तर कुछ कम हो जाता? मगर मन की कुंठा का क्या करें भाई? छम्मक्छल्लो बहुत छोटी थी, जब शर्मिला और पटौदी का ब्याह हुआ था. तब शर्मिला अपने कैरियर से विदा नहीं हुई थीं. छम्मक्छल्लो को याद है, तब भी सभी यही कहते थे, क्या देख कर शर्मिला ने पटौदी से शादी की, या टैगोर का नाम मिट्टी में मिला दिया और ना जाने क्या-क्या?
      कुछ माह पहले एक टीवी चैनल पर जिगोलो पर कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे एंकर महोदय बार बार यही कह रहे थे- दिल्ली की आंटियां... दिल्ली की आंटियां! क्या कभी ऐसा हुआ है कि सेक्स के अपराध में पकडे गए पुरुषों को अंकल, दादा, बाबा कहकर पुकारा गया हो? छम्मक्छल्लो को तो अब डर लग रहा हि कि कल को कोई यह ना पूछ बैठे कि कौन जवाहर लाल नेहरू? और जवाब आए- राहुल गांधी के परनाना, सोनिया गांधी की सास का बाप. 
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