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Saturday, February 14, 2015

“वसंत के राग, फाग” में डूबा “अवितोको रूम थिएटर”!

8 फरवरी को “अवितोको रूम थिएटर” द्वारा आयोजित“वसंत के राग-फाग” कार्यक्रम ने वहाँ मौजूद सभी के मन को खुशियों से आलोड़ित कर दिया।“अवितोको रूम थिएटर” के प्रेमियों के लिएप्रेमियों के द्वारा और प्रेमियों से सजी इस शाम ने वसंत और होली के रंगों से माहौल को कला और साहित्यमय कर दिया। कविताकहानीव्यंग्यनाटकपेंटिंगगीतलोक गीतहोली गीत! लोग आते गए और अपनी-अपनी कला की छाप छोड़ते गए। वसंत को गानेवाली 7 वर्षीया आरना थी तो अपने नाटक और सालसा नृत्य से सभी को सम्मोहित करनेवाले वरिष्ठ नागरिक और फिल्मटीवीरंगमंच कलाकार राम गिरिधर थे। मनीषा मेहता के व्यंग्य से हॉल ठहाकों से गूंज रहा था तो सुजाता के प्रश्न कि रावण के दर्द को कब लोग समझेंगेलोगों के मन में प्रश्न- प्रति प्रश्न पैदा कर रहा था। प्रभा मुजूमदार और दिल्ली से आई सीमा सिंह की कविताएं सबके मन में उत्सुकता जगा रही थींतो उत्कर्ष और अग्रिमा ने अपनी पेंटिंग के जरिये यह बताया कि वसंत हमारे द्वार पर ठिठका खड़ा हैपेड़ -पौधों का नाश कर हमी उसे आने से रोक रहे हैं। वसंत की महत्ता खेत-खलिहानों के अनाजसरसों के फूलआम की मंजरियों के साथ साथ होली-गीत के बिना संपूर्ण नहीं होती। झूमर और होरी गीत में सभी को सराबोर किया विभा रानी और अविनाश दास ने। गीतनृत्य पर लोगों के कदम थिरकते गएथपकियों से सुर मे सुर मिलते गए और डूबते गए लोग वसंत के मदमाते रंग और रूप में। और इन सबको अपने कुशल संचालन से कड़ी-दर कड़ी में पिरोया डॉ निवेदिता सरकार ने।



मार्च 2014 में आरंभ हुआ अवितोको रूम थिएटर अपने अभिनव स्वरूप के कारण अपने पहले कार्यक्रम से ही चर्चा में आ गया। हर माह के पहले इतवार को आयोजित अवितोको रूम थिएटर का उद्देश्य छुपी हुई प्रतिभाओं को मंच प्रदान कराते हुए रचनात्मकता के हर क्षेत्र के विशिष्टजनों से उनका साक्षात्कार कराना है। इसके अलावा “अवितोको रूम थिएटर में साहित्य और कला के हर पक्ष पर प्रकाश डाला जाता हैताकि कला के हर क्षेत्र को कला-प्रेमी और कला से जुड़े लोग जान सकें। “अवितोको रूम थिएटर” का एक और महत उद्देश्य हैन्यूनतम खर्च में सर्व साधारण के लिए सार्थक थिएटर उपलब्ध कराना।“अवितोको” कलाथिएटर और साहित्य के माध्यम से जेल बंदियोंवरिष्ठ नागरिको, ‘विशेष’ वर्ग के लोगों के साथ-साथ समाज की मुख्य धारा से जुड़े लोगों के लिए नाटकप्रशिक्षणकार्यशालाएँ आयोजित करता है। विशेष जानकारी के लिए 09820619161/ gonujha.jha@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। ###



Avitoko's Room Theatre filled the hearts of all present in the room with the Colors of Vasant and Valentine. An evening made possible just by its people, brought to life the beautiful colors and emotions of spring. The stage was set on fire by performer after performer, be it young Aarna, with poetry or good old Mr Ram Giridhar with enthusiastic salsa moves. The room echoed with laughter during Manisha Mehtas stand up comedy. With every performance one got to experience a new aspect of society linked to spring. A woman's life can be coloured by her dreams and ambitions said Prabha and Seema Singh from Delhi through poetry. Sujata's burning question about Ravan's distress left the audience wondering about the other side of the Ramayan story. Utkarsh and Agrima brought to life a pressing environmental issue of forest depletion. Be it the folk songs sung during Holi in the villages of Bihar brought to life by Vibha Rani and Avinash or the touching story about the life and love of a strong, independent woman after divorce by Rashmi the atmosphere resonated encouragement and appreciation for art and creativity. The clapping, cheering and tapping of feet in rhythm brought together strangers who had one thing in common - a love for expression. Avitoko's Room Theatre has been arranging these stages for the last 12 months on the first Sunday of every month. It is open to everyone. For further details: please contact: 9820619161 or you can email your queries to : gonujha.jha@gmail.com
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