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छम्मकछल्लो की दुनिया में आप भी आइए.

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Saturday, January 15, 2011

ग्राहक गाय है.

छम्मकछल्लो खुश है.किसी ने तो उसकी बात पर तवज़्ज़ो लिया. काम के सिलसिले में लगातार वह किंगफिशर से यात्रा करती रही है.आज वह बेलगाम से मुंबई आई. परसो वह मुंबई से बेलगाम गई थी. बेलगाम केलिए मुंबई से रोजाना उडान किंगफिशर ने शुरु की है.समय की बचत होती है, इसमें दो राय नहीं. किंगफिशर के विजय माल्या कहते हैं कि आप उन्हें मेल करें, अपनी बात कहें. छम्मकछल्लो ने आजमाया. विजय माल्या ने नहीं,उनकी प्रतिनिधि ने जवाब भेजा.
आप सोच रहे होंगे कि छम्मकछल्लो को ऐसा क्या सूझ गया कि वह विजय माल्या से भिड गई?कुछ नहीं.हम गरीब,भुक्खड लोग.खाने के अलावा कुछ  और सोच सकते हैं क्या? किंगफिशर दावा करता रहा है कि वह अपनी किंगफिशर रेड की सभी उडान में खाना देता है. अब जब देता है तो दानवीर हो गया.लेकिन  दानवीर कर्ण के तेवर से कोई थोडे न दान देता है.वह तो ठसके के साथ भीख की तरह  देता है.जो देते हैं सो खाओ,वरना जाओ. छम्मकछल्लो खाती रही, खाती रही,पर कबतक कोई बेस्वाद, गीला, ठंढा सैंडविच दान या भीख समझ कर खाता रहे?सुझाव लिखने पर किसी ने जवाब नहीं दिया.विजय माल्या को दिया तो प्रतिनिधि ने जवाब दिया कि भाई,वे लोग तो अपने महान ग्राहक को खुश रखने के हर सम्भव उपाय करते हैं.उस सम्भव उपाय में है सैंडविच.खाना है तो खाइये वरना?
छम्मकछल्लो के कई दोस्त भी इस सैंडविच से परेशान थे. उन सबको भी ध्यान में राखकर छम्मकछल्लो ने परसो भी अनुरोध किया कि ऐसा सैंडविच ना दें.दिन भारत के थके हारे, कुछ गर्म और ताज़ा खाना दें.
छम्मकछल्लो की बात सुनी गई.और आज से खाना देना बन्द कर दिया गया. पूछने पर जवाब मिला, कई गेस्ट को हमारा खाना पसन्द नहीं आता. वे सैंडविच को लेकर शिकय्यत करते हैं.इससे मैनेजमेंट ने अब देना ही बन्द कर दिया. वह भी बिना पूर्व सूचना के.
कहानी की शिक्षा: किसी से कुछ मांगिए मत, अधिकार भी नहीं.जो देवे,भीख समझ कर ले लीजिए. खाना भी. हम भुक्खड हिन्दुस्तानी. खाने के अलावा कुछ सोचते ही नहीं.हवाई जहाज में भी खाना? अब क्या करें विजय भाई?हवाई जहाज में स्टेशन नहीं होता न और न मूंगफली,पूरी जिलेबी बेचनेवाला आता है कि 5 रुपय्या का खरीद लें और फांकते हुए चले जाएं.आप जो बेचते हैं, ऊ 5 का 50 होता है और स्वाद में?उसी के मारे तो आपसे बोल पडे थे.हम भूल गए थे कि बीयर आ बिकनी के कॉम्बीनेशन में सैंडविचे चलता है, रोटी भात नहीं.परसो फिर जाना है.हम भात दाल बांध कर ले जाएंगे, विजय भाई, कहे देते हैं.हां!
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