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Saturday, April 17, 2010

"लाडली मीडिया अवार्ड "- chhammakchhallokahis.blogspot.comको


आए हाए हाए! बहुत दिन बाद छम्मकछल्लो आपसे मुखातिब है. अरे बस यूं ही, एक जान दिल जहान! सब कुछ कर लेने की ख्वाहिश! पता है ना कि एक ही जनम है, सो उसी में भरपूर जी लेने की चाहत! अभी दो-दो नाटक "बिम्ब-प्रतिबिम्ब" और "मि. जिन्ना" में लगी थी. जेलों में थिएटर वर्कशॉप कर रही थी. कॉर्पोरेट हाउसेस में विकासात्मक प्रशिक्षण कार्यक्रम ले रही थी.  

बस जी, ज़्यादा नहीं. महीने भारत की ही तो चुप्पी ! इस ब्लॉग पर मुखातिब नहीं रही. मगर ब्लॉग चर्चा में रहा. याद आता है, "बेटियों का ब्लॉग" पर 31/3/2008 को पोस्ट किया गया एक पोस्ट. और उस पोस्ट से शुरु  हुई "लाडली मीडिया अवार्ड " की कहानी. उस साल के लिए "बेटियों का ब्लॉग" को  "लाडली मीडिया अवार्ड " मिला. इस बीच छम्मकछल्लो के इस ब्लॉग पर वह जो भी लिखती रही, उसे आप सबने बडे ज़ज़्बात से लिया और उसका नतीज़ा रहा, वर्ष 2009-10 का "लाडली मीडिया अवार्ड ". इसे 14 अप्रैल, 2010 को भोपाल में मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और भोपाल की मेयर श्रीमती कृष्णा गोर के हाथों प्रदान किया गया. प्रशस्ति पत्र ज्यों का त्यों आपके सामने प्रस्तुत है- 

In recognition of her efforts to question gender issues through her blog using humour and satire 

"In her blog on "chhammakchhallokahis.blogspot.com", Vibha Rani draws excellent analogies and anecdotes from mythology and raises thought provoking questions related to women's status in society. 

for her satirical style and use of humour on contemporary gender issues, Vibha Rani is awarded The UNFPA-Laadli Media Award for Gender Sensitivity 2009-10

Laadli is Population First's Girl Child Campaign that addresses an important social issues- the bias against the girl child which makes her unwelcome in many families.  The UNFPA-Laadli Media Award for Gender Sensitivity were instituted by Population First to highlight, acknowledge and celebrate the commendable efforts by various media at providing gender just perspectives portayals and analysis.

अच्छा लगा कि "बेटियों का ब्लॉग" के लिए भी छम्मकछल्लो के लेख का आधार मिला और अब इस ब्लॉग को इस अवार्ड के लिए चुना गया. कहना ना होगा कि इसे इस मंज़िल तक पहुंचाने में आप सबका बहुत बडा योगदान रहा है. मज़ेदार बात यह रही कि कई लोगों ने कहा कि हमें यह लगता रहा कि यह कोई ghost writing यानी छद्म लेखन है, क्योंकि विषय को जिस बोल्डनेस से उठाया गया है, वह किसी महिला के बस की बात नहीं. फिर से महिलाओं की कूव्वत पर सवाल! भाई, लोग बडे से बडे काम कर जाते हैं, हम उस पर लिख दें, तो .......! छम्मकछल्लो का तो सुभाव ही है बेदिली से दिल की तह तक जाना. दिल की तह तक की यह राह रपटीली है तो वह क्या करे!  

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