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Wednesday, March 5, 2008

बेटू तोषी के लिए

आज छाम्माक्छाल्लो की बिटिया तोषी का जन्म दिन है। वह पिछले सितम्बर, २००७ से पाकिस्तान के लाहौर में है। लाहौर से याद आता है 'जिन लाहौर नई वेख्या समझो वो जम्याई नही'। तोषी ने लाहौर देख लिया। आज अगर सीमा की बात नही रहती तो हम सब भी यह शहर देख पाते और इसकी माटी की खूबी को महसूस कर पाते। तोषी आर्टिस्ट है। अपनी पढाई के सिलसिले मे वह वहां है। जिस तरह का प्रेम, आदर, सम्मान स्नेह उसे मिल रहा है, अपनी प्रतिभा के कारण, अपनी शालीनता के कारण और सबसे बड़ी बात, अपनी भारतीयता के कारण, वह सोचने पर मज़बूर कर देता है कि काश, ये सीमाएं नही रहतीं। उसके जन्म दिन पर अपनी चन्द लाइनें उसके लिए-
आओ तुम्हारे लिए बुन दूँ एक रात
तारों से जगमगाती। चाँद से नहाती
सपनों से भीगी भीगी
बहती हवाओं में इच्छाओं के झूमते-गाते झोंके
मेरी बेटू, ओस से भीगी
सुबह जब होगी
तुम आँखें खोलोगी अपने सपनों के साथ
तुम्हारी अलसाई आंखों के कोए से झाकेंगे गेंदे -गुलाब
सूरज टैब अपने दामन से निकाल छोड़ जायेगा सतरंगी किरणों की बारिश
गाती-मुस्काती आएँगी चिदियाँ
मचयेंगी शोर-
खोलो, ज़ल्दी खोलो,
खिड़कियाँ
हटाओ भारी- भारी परदे
हम आई हैं, घुंघरुओं सी बजती, नीम सी सरसराती
महसूस करती हूँ
अपने ह्रदय के भीतर
बहुत गहरे
यादों के झोंके मुझे
पहुंचा देते हैं
यादों की पोतालियों के पास
नवजात चूजों से गुलाबी तलवे
नन्हें हाथों से खुजाती अपना माथा
दूध पीना छोड़, किलकारी भर भर, बतियाती, मुंह से फेंकती दूध की फुहार
नन्ही कतकी से थाप देती, ढोल बजाती तुम
भर देह माती
आंखों में काजल की मोटी धार
मन में उठाती आशंका-
नज़र ना लग जाए
सबसे ज्यादा टू माँ की ही
घुघुआ मन्ना पर ही सो जाती गहरी नींद
बीच माथे पर
दो चुटिया- खग्लोश'
मेरी गुदगुदी से खिलखिलाती, रन झुन बजती तुम
यूँ ही किलकती रहो
तुम- आज, कल, सदा....!
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