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Wednesday, December 19, 2012

देवी और बलात्कार


लड़की,
मत निकलो घर से बाहर।
देवियों की पूजावाला है यह देश।
हम बनाते है बड़ी-बड़ी मूर्तिया, देवी की-
सुंदर मुंह,
बड़े- बड़े वक्ष
मटर के दाने से उनके निप्पल,
भरे-भरे नितंब
जांघों के मध्य सुडौल चिकनाई।
उसके बाद ओढा देते हैं लाल-पीली साड़ी।
गाते हैं भजन- सिर हिला के, देह झूमा के।
लड़की,
तुम भी बड़ी होती हो इनही आकार-प्रकारों के बीच।
दिल्ली हो कि  बे- दिल
तुम हो महज एक मूर्ति।
गढ़ते हुए देखेंगे तुम्हारी एक-एक रेघ
फिर नोचेंगे, खाएँगे,
रोओगी, तुम्ही दागी जाओगी-
क्यों निकली थी बाहर?
क्यों पहने तंग कपड़े?
क्यों रखा मोबाइल?
लड़की!
बनी रहो देवी की मूर्ति भर
मूर्ति कभी आवाज नही करती,
बस होती रहती है दग्ध-विदग्ध!
नहीं कह पाती कि आ रही है उसे शर्म,
हो रही है वह असहज
अपने वक्ष और नितंब पर उनकी उँगलियाँ फिरते-पाते।
सुघड़ता के नाम पर यह कैसा बलात्कार?
लड़की- तुम भी देवी हो-
जीएमटी हो कंचक,
पूजी जाती हो सप्तमी से नवमी तक
लड़की-
कभी बन पाओगी मनुष्य?




10 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

दिल्ली की घटना से आक्रोशित हो लिखी सटीक रचना ....

जीएमटी हो कंचक, जीएमटी समझ नहीं आया

amit kumar srivastava said...

ऐसा ही तो है...|

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 20 -12 -2012 को यहाँ भी है

....
मेरे भीतर का मर्द मार दिया जाये ... पुरुष होने का दंभ ...आज की हलचल में .... संगीता स्वरूप
. .

Vandana Ramasingh said...

फिर नोचेंगे, खाएँगे,
रोओगी, तुम्ही दागी जाओगी-
क्यों निकली थी बाहर?
क्यों पहने तंग कपड़े?
क्यों रखा मोबाइल?
लड़की!

सार्थक लेखन

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

:(((

vandan gupta said...

कडवा सच

अपने इस दर्द के साथ यहाँ आकर उसे न्याय दिलाने मे सहायता कीजिये या कहिये हम खुद की सहायता करेंगे यदि ऐसा करेंगे इस लिंक पर जाकर

इस अभियान मे शामिल होने के लिये सबको प्रेरित कीजिए
http://www.change.org/petitions/union-home-ministry-delhi-government-set-up-fast-track-courts-to-hear-rape-gangrape-cases#

कम से कम हम इतना तो कर ही सकते हैं

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) said...

क्षोभ की स्वाभाविक अभिव्यक्ति


सादर

Unknown said...

बहुत खूब .... आप भी पधारो पता है http://pankajkrsah.blogspot.com

गुड्डोदादी said...

फिर नोचेंगे, खाएँगे,
रोओगी, तुम्ही दागी जाओगी-
क्यों निकली थी बाहर?
(भारत की नारी की कथा की व्यथा)

Unknown said...

only women can save the world from distruction ......