बच्चे झुक जाते हैं, धान रोपने
बर्तन धोने, पॉलिश करने
उठते हैं जबतक कमर सीधी करने
तबतक आंखें धुंधली और बाल
सफ़ेद हो गए होते हैं
हैरत है कि बच्चे इतनी ज़ल्द तय कर लेते हैं फ़ासला
नहीं पाट पाते केवल दो इंच के मुंह और बित्ते भर के पेट
के बीच की दूरी
बच्चे बोते हैं धान के संग अपनी भी उमर
बालियां और बचपन गुम हैं खोई हुई किताबों की तरह।
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